वाशिंग मशीन पर तंज कसते रहे खड़के, भाजपा ने उसी धुले माल से कैबिनेट सजाई और कुछ मंच पर नजर आएं
“वॉशिंग मशीन” से धुले नेता और “शंखनाद” से गूंजा रामलीला मैदान
हल्द्वानी। शनिवार को रामलीला मैदान में कांग्रेस का “विजय शंखनाद” हुआ। शंख फूंकने आए थे खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे। मंच पर शंख था, नीचे नारेबाजी थी, और हवा में 2027 के चुनाव की गंध थी।

खड़गे ने आते ही भाजपा और आर.एस.एस. पर सीधा हमला बोला। आजादी की लड़ाई में कांग्रेस का इतिहास है। आर. एस. एस. और भाजपा का कोई एक नेता बताइए जो देश की आजादी के लिए जेल गया हो? राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान बचाने के लिए पदयात्रा करनी पड़ी, क्योंकि भाजपा आज भी संविधान से खिलवाड़ कर रही है। उत्तराखंड सरकार को घेरते हुए खड़गे बोले कि “भाजपा के पास एक वॉशिंग मशीन है। भ्रष्टाचार में लिप्त नेता को डालो, धोकर बाहर निकालो, और पार्टी में शामिल कर लो।” भीड़ ने ठहाका लगाया। साथ में वादा किया कांग्रेस की सरकार आई तो “बिना सिफारिश, बिना पैसे, सिर्फ मेरिट से नौकरी मिलेगी।” खाली पदों का मुद्दा भी उठाया। किसानों के लिए मनमोहन सिंह की कर्जमाफी, फूड सिक्योरिटी, मनरेगा गिनाए। पेपर लीक और जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुई कार्रवाई को “दमन” बताया। अल्मोड़ा के रवि टम्टा की तारीफ कर कहा “प्रतिभा है, बस मौका नहीं।”

मंच पर यशपाल आर्य, गणेश गोदियाल, हरक सिंह रावत, सुमित हृदयेश समेत पूरा प्रदेश नेतृत्व था। बीच-बीच में SSP मंजुनाथ टीसी के खिलाफ नारे भी गूंजे। खड़गे ने 1973 में पंतनगर यूनिवर्सिटी आने की याद दिलाते हुए कहा हल्द्वानी से ही कांग्रेस की सरकार का शंखनाद होगा।
“दो तरफा धोबीघाट”
खड़गे मंच से “भ्रष्टाचार” और “वॉशिंग मशीन” पर भाषण दे रहे थे। उधर भाजपा सरकार ने कुमाऊं को 3 कैबिनेट मंत्री दिए हुए हैं। संयोग ये कि तीनों ही कभी कांग्रेस का झंडा उठाते थे और इधर कांग्रेस में भी कमाल है। मंच पर बैठे नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और हरक सिंह रावत भी उसी “वॉशिंग मशीन” से होकर ही वापस कांग्रेस में आए हैं। पहले भाजपा, फिर कांग्रेस।
सियासत का गोल-गोल चक्र
कांग्रेस: “भाजपा भ्रष्टों को धोकर लेती है”
भाजपा: “तुम्हारे धुले हुए 3 पीस हमारे कैबिनेट में हैं”
जनता: “और तुम्हारे धुले हुए कुछ पीस मंच पर भाषण दे रहे हैं”
आरोप-प्रत्यारोप की गेंद एक-दूसरे के पाले में, और जनता बीच मैदान में खड़ी तमाशा देख रही है।
मुद्दे कहां हैं?
भाषण में महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य सब आए। लेकिन जमीनी हकीकत वही – पेपर लीक रुका नहीं, नौकरी की फाइलें अटकी हैं, और आंदोलन के नाम पर सिर्फ मंच। न कांग्रेस इन मुद्दों पर बड़ा आंदोलन खड़ा कर पाई, न भाजपा ने स्थायी इलाज दिया।

खड़के खड़क गए। शंख भी बज गया। लेकिन उत्तराखंड की राजनीति में “धोबीघाट” अब दो तरफ चल रहा है। एक तरफ वॉशिंग मशीन का तंज, दूसरी तरफ उसी मशीन से निकले कपड़ों की नुमाइश। और सबसे मजेदार बात – धोबी भी वही, कपड़े भी वही, बस घाट बदल जाता है। जब तक दल-बदल को “रणनीति” और भ्रष्टाचार को “व्यवस्था” कहा जाता रहेगा, तब तक शंखनाद सिर्फ चुनावी मौसम का साउंड इफेक्ट बनकर रह जाएगा।

चुनाव नजदीक हैं। हर दल खुद को “साफ-सुथरा” सर्टिफिकेट दे रहा है और दूसरे को “वॉशिंग मशीन” बता रहा है। शंखनाद हो गया। अब देखना है घंटी कौन बजाता है।































