Home उत्तराखंड दो जयन्तियां, दो विचारधाराएं, एक भारत

दो जयन्तियां, दो विचारधाराएं, एक भारत

429

2 अक्टूबर का दिन भारतीय इतिहास में सिर्फ कैलेंडर की तारीख नहीं है। यह दो चरित्रों, दो दर्शनों और दो तरह की सादगी का संगम है। एक ने चरखे से साम्राज्य हिला दिया, दूसरे ने धोती-कुर्ते में प्रधानमंत्री पद की गरिमा को नई ऊंचाई दी।महात्मा गांधी सिर्फ व्यक्ति नहीं, एक प्रयोग थे। सत्य का प्रयोग, अहिंसा का प्रयोग, सत्ता से असहयोग का प्रयोग। उन्होंने हमें सिखाया कि विरोध के लिए हथियार नहीं, हिम्मत चाहिए। आज जब हर असहमति गाली और हर बहस हिंसा में बदल रही है, गांधी का विचार और प्रासंगिक हो जाता है। गांधी ने अंग्रेजों से लड़ते हुए भी अंग्रेजियत से नफरत करना नहीं सिखाया। उन्होंने स्वच्छता को स्वतंत्रता से पहले रखा। आज स्वच्छ भारत अभियान में झाड़ू उठाता हर हाथ उसी विचार का विस्तार है और उसी दिन जन्मे लाल बहादुर शास्त्री। नाटे कद का वो आदमी जिसका कद इतिहास में सबसे ऊंचा है। ‘जय जवान, जय किसान’ – दो शब्दों में पूरे राष्ट्र का सुरक्षा और अर्थशास्त्र समेट देने वाला नारा। 1965 के युद्ध में जब देश के पास अनाज नहीं था, तो उन्होंने देश से एक वक्त उपवास रखने को कहा और खुद पहले अमल किया। आज जब पद ही प्रदर्शन बन गया है, शास्त्री जी की फटी धोती और कर्ज लेकर खरीदी गई फिएट कार हमें सत्ता की सादगी का अर्थ समझाती है। गांधी और शास्त्री में एक समानता थी – दोनों ने सत्ता को साध्य नहीं, साधन माना। गांधी सत्ता से दूर रहे, शास्त्री सत्ता में रहकर भी उससे दूर रहे। आज के भारत को दोनों की जरूरत है। गांधी की नैतिकता और शास्त्री की निर्भीकता। गांधी की स्वच्छता और शास्त्री की आत्मनिर्भरता। सवाल यह है कि हम जयंती मना रहे हैं या जयंती निभा रहे हैं? माला चढ़ाना आसान है, उनके रास्ते पर चलना कठिन। अगर हर नागरिक अपने हिस्से की स्वच्छता, ईमानदारी और संयम की जिम्मेदारी ले ले, तो यही दोनों महापुरुषों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।