खेलोगे-कूदोगे बनोगे खराब वाली सोच पर धामी सरकार, नई शिक्षा नीति में शारीरिक शिक्षा अनिवार्य, भर्ती में पद ही खत्म
देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर धामी सरकार के दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर एक बार फिर उजागर हो गया है। यह प्रदेश का दुर्भाग्य ही है कि गिने-चुने शहरों को छोड़ दें तो सरकार को अन्य जिले नजर ही नहीं आते। शिक्षा के क्षेत्र में तो हालात और बदतर हैं – धामी सरकार की अनदेखी के चलते अधिकांश सरकारी स्कूल बंदी की कगार पर हैं और प्रशिक्षित युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। ताजा मामला प्रदेश में हाल ही में उच्चीकृत हुए विद्यालयों का है, जिसने सरकार की कथनी और करनी को बेनकाब कर दिया है।

शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित बेरोजगार संगठन उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चन्द्र पाण्डेय ने बताया कि एक तरफ उत्तराखंड सरकार मंचों से नई शिक्षा नीति (NEP-2020) लागू करने का ढिंढोरा पीट रही है, जिसमें शारीरिक शिक्षा को कक्षा 1 से 12 तक अनिवार्य विषय बताया गया है। वहीं दूसरी तरफ हकीकत यह है कि जिन विद्यालयों को प्राइमरी से जूनियर और जूनियर से हाईस्कूल में उच्चीकृत किया गया है, उनमें सरकार ने शारीरिक शिक्षा के पद को ही समाप्त कर दिया है। यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि उत्तराखंड के नौनिहालों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि जिस उम्र में बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने की सबसे ज्यादा जरूरत है, उसी उम्र में सरकार खेल, अनुशासन और स्वास्थ्य की भावना सिखाने वाले विषय को ही खत्म कर रही है। इससे बच्चों में नशे और मोबाइल की लत जैसी प्रवृत्तियां तो बढ़ेंगी ही, साथ ही हजारों प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षा बेरोजगारों के भविष्य पर भी ताला लग गया है।
इस जन-विरोधी निर्णय पर शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित बेरोजगार संगठन उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चन्द्र पाण्डेय ने कड़ा आक्रोश जताया है। प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चन्द्र पाण्डेय और पूरी प्रदेश कार्यकारिणी इस निर्णय का पुरजोर विरोध करती है। यह सरकार का दोहरा चरित्र है। एक तरफ फिट इंडिया और खेलो इंडिया के नारे, दूसरी तरफ शारीरिक शिक्षक के पद समाप्त। वहीं संगठन ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उच्चीकृत विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा के पद को तुरंत बहाल नहीं किया गया तो संगठन सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी धामी सरकार की होगी।































