3 महीने से नहीं भरे कई सिलेंडर, लकड़ी पर बन रहा मिड-डे मील
कम छात्र संख्या से घट रही राशि, समाजसेवी हेमंत गौनिया ने उठाई मांग – न्यूनतम बजट और गैस के लिए अलग प्रावधान हो
हल्द्वानी। भीमताल ब्लॉक के कई सरकारी विद्यालयों में बच्चों के मिड-डे मील की व्यवस्था गंभीर संकट से जूझ रही है। स्कूलों में पिछले करीब 3 महीने से गैस सिलेंडर नहीं भरे जा सके हैं। मजबूरी में कई जगह खाना लकड़ी पर बनाया जा रहा है। समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत गौनिया ने बताया कि समस्या गैस एजेंसी को चेक न देने की नहीं है। असल दिक्कत स्कूल के खाते में पर्याप्त धनराशि न होने की है। शिक्षा विभाग से PM POSHAN योजना के तहत स्कूलों को प्रति बच्चे के हिसाब से राशि मिलती है। 1 मई 2025 से बालवाटिका और प्राथमिक स्तर के लिए ₹6.78 और उच्च प्राथमिक के लिए ₹10.17 प्रति बच्चा प्रति दिन निर्धारित है। लेकिन कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में कुल राशि इतनी कम हो जाती है कि उसी से राशन, ईंधन और अन्य खर्च पूरे करने पड़ते हैं। ऐसे में गैस सिलेंडर रिफिल करवाना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो गया है।
गैस न मिलने के कारण कई विद्यालयों में खाना लकड़ी पर पकाया जा रहा है। गौनिया ने कहा कि लकड़ी भी मुफ्त नहीं मिलती। उसे मंगवाने के लिए भोजन माताओं को भुगतान करना पड़ता है, जिससे भोजन व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।हेमंत गौनिया ने सरकार के सामने 4 प्रमुख मांगें रखी है जिनमें क्रमश: कम छात्र संख्या होने पर भी स्कूलों को न्यूनतम निश्चित राशि दी जाए, गैस सिलेंडर के लिए अलग से बजट का प्रावधान हो, कम छात्र वाले स्कूलों के लिए विशेष प्रावधान किए जाएं और बच्चों के पोष्टिक भोजन और स्वास्थ्य से कोई समझौता न हो उन्होंने कहा, “बच्चों का हक, हमारी जिम्मेदारी है। सरकार को तुरंत ठोस कदम उठाकर स्कूलों की रसोई बचानी चाहिए।”































