25 वर्षों की सेवा, साहित्य और संस्कृतियों का संगम बना यादगार उत्सव
25 साल पार कर संपर्क पहुँचा सात समंदर पार
विमल चौहान
कुछ यात्राएँ केवल वर्षों की गणना नहीं होतीं, वे समय के माथे पर लिखी गई ऐसी इबारत होती हैं, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ पढ़ती हैं और प्रेरणा लेती हैं।
संपर्क संस्था की 25 वर्षों की यात्रा भी ऐसी ही एक यात्रा है—सेवा से सृजन तक, साहित्य से समाज तक और स्थानीय धरती से देश की सीमाओं के पार तक पहुँचने वाली एक जीवंत यात्रा।

संपर्क संस्था की 25 वर्षों की यात्रा भी ऐसी ही एक यात्रा है—सेवा से सृजन तक, साहित्य से समाज तक और स्थानीय धरती से देश की सीमाओं के पार तक पहुँचने वाली एक जीवंत यात्रा।
जिस औद्योगिक नगरी किशनगढ़ में समाज सेवा के संकल्प के साथ संपर्क संस्था ने अपनी यात्रा 2001 में आरंभ की थी, उसी मार्बल नगरी में संस्था का भव्य, विशाल और गरिमामय रजत जयंती समारोह 8 व 9 अगस्त 2026 को आयोजित हुआ।
यह केवल एक समारोह नहीं था, बल्कि 25 वर्षों के संघर्ष, समर्पण, उपलब्धियों और सामाजिक सरोकारों का उत्सव था। देशभर से आए साहित्यकार, लेखक, कवि, लेखिकाएँ, मीडियाकर्मी, राजनेता, उद्योगपति और समाजसेवी इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बने।
एक समारोह जो स्मृति बन गया
किशनगढ़ की इस धरती पर सम्पन्न हुआ संपर्क संस्था का रजत जयंती समारोह इसलिए महत्वपूर्ण नहीं था कि उसने केवल 25 वर्षों का उत्सव मनाया। उसकी सार्थकता इस बात में थी कि उसने इन 25 वर्षों के काम को समाज, साहित्य, संस्कृति और सेवा के अनेक रंगों में एक साथ सामने रखा।
यहाँ पुस्तकों का विमोचन हुआ तो नवोदित प्रतिभाओं का सम्मान भी हुआ। साहित्य की गंभीर चर्चा हुई तो लोकसंस्कृतियों का उल्लास भी दिखाई दिया। सामाजिक सरोकारों पर विचार हुआ तो राष्ट्रभक्ति के गीतों ने वातावरण को भावनाओं से भर दिया। अलग-अलग प्रदेशों से आए लोग मिले तो विविध संस्कृतियाँ एक-दूसरे से जुड़ीं और साहित्यकारों ने अपनी रचनात्मक यात्राओं को साझा किया।
किशनगढ़ की मार्बल नगरी में सजा यह रजत उत्सव वास्तव में संपर्क की उस सोच का प्रतिबिंब बना, जिसमें संपर्क केवल नाम नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ने की एक निरंतर प्रक्रिया है।
25 वर्षों की यह यात्रा बताती है कि कोई संस्था केवल अपने कार्यालयों, कार्यक्रमों या उपलब्धियों से बड़ी नहीं होती। वह तब बड़ी होती है, जब उसके प्रयास किसी प्रतिभा को मंच देते हैं, किसी बेटी के भविष्य को दिशा देते हैं, किसी परिवार के जीवन में आशा जगाते हैं, किसी लेखक की आवाज को पाठकों तक पहुँचाते हैं और समाज में सेवा की एक नई संभावना पैदा करते हैं।
सभी वक्ताओं ने संस्था के अध्यक्ष अनिल लढ़ा और उनकी सशक्त टीम की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया। देशभर से आई लेखिकाओं ने भी अपने वक्तव्यों में इसी आत्मीय भाव को व्यक्त किया। उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और अपनी कविताओं की प्रस्तुतियाँ दीं।
किशनगढ़ की धरती पर सम्पन्न यह रजत समारोह एक पड़ाव अवश्य था, लेकिन यात्रा का अंत नहीं। क्योंकि जिन संस्थाओं की नींव सेवा में होती है, उनके लिए हर पड़ाव अगली मंजिल की शुरुआत होता है।
सेवा के संकल्प से उपलब्धियों की रजत यात्रा
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, केंद्रीय किसान कल्याण मंत्री भागीरथ चौधरी, रोजियम ग्रुप चैयरमेन अर्पित जैन, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक भानु प्रकाश गुर्जर थे। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि जन्म और मृत्यु ईश्वर के हाथ में होती है, लेकिन इनके बीच का समय मानव सेवा के लिए होता है।।
संस्था के प्रयासों और उपलब्धियों की सराहना करते हुए मानव सेवा के लिए निरंतर समर्पित रहने वाले ऐसे संगठन को समाज की आवश्यकता बताया।
इस अवसर पर 11 पुस्तकों का विमोचन किया गया तथा संस्थापक सदस्यों, नवोदित प्रतिभाओं और कवयित्रियों को सम्मानित किया गया।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने संस्था के प्रयासों और उपलब्धियों की सराहना करते हुए मानव सेवा के लिए निरंतर समर्पित रहने वाले ऐसे संगठन को समाज की आवश्यकता बताया।
इससे पूर्व संस्था के अध्यक्ष अनिल लढ़ा ने संपर्क के गठन, इतिहास, 25 वर्षों की यात्रा और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। संस्था की डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया, जिसने इस दीर्घ यात्रा के अनेक पड़ावों को स्मृतियों के पर्दे पर जीवंत कर दिया।
साहित्य ने जब समारोह को आत्मा दी
रजत जयंती समारोह का द्वितीय सत्र पूर्णतः साहित्यिक रहा। इस सत्र के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार प्रेम आनंदकर थे। अध्यक्षता संस्था के उपाध्यक्ष विमल चौहान ने की और आगरा से पधारी देश की प्रमुख साहित्यकार डॉ. शुभ्रा पांडेय, सीमा भाटी विशिष्ट अतिथि रहीं।
डॉ. शुभ्रा पांडेय ने अपने संबोधन में वर्तमान सामाजिक व्यवस्था, टूटते परिवारों और धीरे-धीरे लुप्त होती संवेदनाओं पर मार्मिक और प्रेरणास्पद विचार रखे। उनका वक्तव्य साहित्य को केवल शब्दों की सजावट नहीं, बल्कि समाज के भीतर झाँकने वाला आईना बनाने वाला रहा।
देशभर से आए लेखकों, साहित्यकारों और लेखिकाओं ने विविध विषयों पर अपनी कविताएँ प्रस्तुत कीं और पुस्तक लेखन को लेकर अपने विचार साझा किए।
जब अनेक संस्कृतियाँ एक मंच पर उतरीं
रजत जयंती समारोह का एक और आकर्षण रहा—विभिन्न संस्कृतियों का अद्भुत संगम।
अग्रसेन विहार के आकर्षक हॉल में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि देश के प्रमुख औद्योगिक समूह आर. के. मार्बल के वित्त प्रमुख सुभाष जी अग्रवाल थे।
विभिन्न राज्यों से आई संस्कृतियों के रंग, पारंपरिक परिधान, गीत और नृत्य ने वातावरण को जीवंत कर दिया। हर प्रस्तुति अपने साथ एक अलग प्रदेश की मिट्टी की खुशबू लेकर आई और देखते ही देखते पूरा सभागार भारत की विविधता के एक सुंदर चित्र में बदल गया।
उत्तराखंड से आए दल की गीत एवं नृत्य प्रस्तुति को विशेष रूप से सराहा गया। एक प्रदेश की लोकसंस्कृति जब दूसरे प्रदेश की धरती पर अपनी पहचान के साथ उतरी तो वह केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं रही, बल्कि दो संस्कृतियों के बीच आत्मीय संवाद बन गई।
किशनगढ़ की 25 से अधिक प्रतिभाओं ने भी अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। राष्ट्रभक्ति के गीतों ने वातावरण को देशप्रेम के रंग में रंग दिया। ऐसा लगा जैसे अलग-अलग प्रदेशों से आए लोग अपनी-अपनी पहचान लेकर आए जरूर हैं, लेकिन अंततः सबकी धड़कन एक ही राष्ट्रगान में समाहित हो जाती है।
संस्था के 25 वर्ष पूर्ण होने और अध्यक्ष अनिल लढ़ा के जन्मदिन के अवसर पर केक काटा गया। संगीत की सुरमधुर लहरियों के बीच संस्था के सदस्यों और अतिथियों के साथ समारोह के संयोजक एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. अखिल शुक्ला, आर के मार्बल के वित्त निदेशक सुभाष अग्रवाल तक स्वयं को नृत्य करने से रोक नहीं पाए। औपचारिकता की सीमाएँ उस क्षण टूट गईं और पूरा वातावरण आत्मीय उल्लास में बदल गया।
फिर मिलेंगे’—एक समापन नहीं, अगले सफर का वादा
रजत जयंती का दो दिवसीय समारोह जब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँचा तो वातावरण में विदाई की उदासी से अधिक एक नए संकल्प की ऊर्जा थी।
समापन समारोह का भाव था—‘फिर मिलेंगे’।
एक ऐसे भविष्य के लिए, जहाँ संपर्क और व्यापक हो, साहित्य और समृद्ध हो, प्रतिभाओं को और मंच मिलें, संस्कृतियाँ और करीब आएँ और मानव सेवा की यह यात्रा आने वाले वर्षों में और दूर तक अपना उजाला फैलाती रहे।
रजत जयंती की यह गाथा इसलिए याद रहेगी—क्योंकि यह केवल 25 वर्षों का उत्सव नहीं, बल्कि 25 वर्षों से लगातार जलती उस ज्योति का उत्सव है, जिसका प्रकाश आने वाले समय को भी दिशा देता रहेगा।
टीम बनी सफलता का जरिया
आयोजन को सफल बनाने के लिए संपर्क समन्वयक महासचिव रेनू श्रीवास्तव, सुनील अग्रवाल, विमल चौहान, डॉ अखिल शुक्ला, डॉ रेनू श्री वास्तव राशिका शर्मा,सीमा वालिया, ललिता कापड़ी, परमानंद चावला, कल्पना टाक ,सुनीता शर्मा, प्रेम आनन्दकर, अविनाश शर्मा सहित अनेक लोगों ने सुंदर व्यवस्थाओं कार्यकुशलता के साथ आयोजन को सफल बनाने में महती भूमिका निभाई।































