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“जनता त्रस्त, व्यवस्था मस्त” समस्याओं के लिए मंत्री के दरबार में लगी कतारें

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कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा के कैम्प कार्यालय में उमड़ी भीड़, विभागों की लापरवाही पर सवाल

हल्द्वानी । सरकारी काम सरकारी दफ्तरों में नहीं, अब कैबिनेट मंत्री के दरबार में हो रहे हैं। रविवार को शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा के कैम्प कार्यालय में सुबह से ही आम जनता का तांता लगा रहा। सड़क, पैदल मार्ग से लेकर बुनियादी सुविधाओं तक हर समस्या की फरियाद लेकर पहुंचे लोग घंटों इंतजार करते नजर आए।

स्थिति यह है कि जिन कार्यों को संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारियों को समय पर निपटाना चाहिए, उनके लिए भी लोगों को मंत्री कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कई लोग धक्के-मुक्की के बीच अपनी बात पहुंचाने की कोशिश करते दिखे। नतीजा: समय की बर्बादी और बढ़ती नाराजगी।

क्यों पहुंच रहे लोग मंत्री के पास

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और अन्य विभागों में न तो सुनवाई हो रही है और न ही काम में अनुशासन दिख रहा है।

  • सड़क निर्माण: कई मोहल्लों में अधूरी सड़कें और गड्ढे हादसों को न्योता दे रहे हैं
  • पैदल मार्ग: बाजार और स्कूल जाने वाले रास्ते क्षतिग्रस्त, बारिश में हालात और खराब
  • अन्य समस्याएं: नाली, सफाई और जल निकासी जैसी रोजमर्रा की शिकायतें भी शामिल

पीड़ितों का आरोप है कि विभागीय कार्यालयों में फाइलें अटकी हैं, जबकि मंत्री के कैम्प में आकर ही कुछ आश्वासन मिल पाता है।

“अधिकारी मस्त, जनता परेशान”

कैम्प कार्यालय के बाहर खड़े एक बुजुर्ग ने कहा, “हम टैक्स देते हैं, लेकिन काम के लिए मंत्री जी के दरवाजे खटखटाने पड़ रहे हैं।” दूसरे फरियादी ने कहा कि रोजगार और घर-परिवार छोड़कर यहां आना पड़ रहा है, फिर भी गारंटी नहीं कि काम होगा। इस पूरे घटनाक्रम से एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि जब रोज की छोटी-छोटी समस्याओं के लिए ही जनता को मंत्री दरबार पहुंचना पड़े, तो नए विकास कार्य और बड़ी योजनाएं धरातल पर कैसे उतरेंगी?

जिम्मेदारी तय हो

जनता की नाराजगी साफ है। लोग चाहते हैं कि विभागीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझें और फील्ड में जाकर समस्याएं हल करें, ताकि मंत्री कार्यालय बोझमुक्त हो और शासन-प्रशासन का मूल काम सुचारू चल सके। फिलहाल कैम्प कार्यालय में भीड़ का बढ़ना इस बात का संकेत है कि व्यवस्था और अनुशासन दोनों की कसौटी पर सरकारी तंत्र खरा नहीं उतर रहा।