Home उत्तराखंड किसान मंच ने पूछा – जमीन-खनिज हमारे तो अधिकार क्यों नहीं

किसान मंच ने पूछा – जमीन-खनिज हमारे तो अधिकार क्यों नहीं

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MMDR संशोधन से उत्तराखंड के हाथ बंधेंगे?

नई धारा 9D पर सवाल: खनिज पर कर लगाने की राज्य की शक्ति होगी सीमित, सांसदों की चुप्पी पर भी उठे सवाल

हल्द्वानी। किसान मंच उत्तराखंड ने Mines and Minerals Amendment Bill, 2026 को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। मंच का आरोप है कि बिल की नई धारा 9D से राज्य सरकार खनिज और खनिज-युक्त जमीन पर टैक्स, सेस और लेवी लगाने में स्वतंत्र नहीं रह जाएगी।

प्रदेश अध्यक्ष किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय ने कहा, “जमीन उत्तराखंड की, खनिज उत्तराखंड की धरती में, खनन का दर्द भी हम झेलें। पहाड़ कटें, सड़कें टूटें, पर्यावरण का असर हमारे गांवों पर पड़े। फिर राजस्व के फैसले में हमारी ताकत क्यों कम हो?”
उपाध्याय ने उत्तराखंड के सभी सांसदों से पूछा कि इतने बड़े विधेयक पर संसद में राज्य का पक्ष क्या रखा गया।

  1. राजस्व पर असर: नई धारा 9D से उत्तराखंड के खनन राजस्व को कितना नुकसान होगा?
  2. हिमालयी विशेषता: क्या संसद में कहा गया कि पहाड़ी राज्यों की स्थिति मैदानी खनन राज्यों से अलग है?
  3. राज्य से राय: बिल से पहले केंद्र ने उत्तराखंड सरकार से सलाह ली थी या नहीं? अगर ली तो राज्य ने क्या कहा?
  4. वित्तीय स्वायत्तता: सरकार ने आकलन किया है कि भविष्य में राज्य की कर लगाने की शक्ति कितनी घटेगी?

पुराने बकाये और पर्यावरण का मुद्दा

मंच ने मांग की कि सरकार बताए कि खनिज से जुड़े कितने पुराने टैक्स और सेस के दावे अभी लंबित हैं। नई व्यवस्था लागू होने पर उन दावों का क्या होगा और कितने करोड़ का संभावित नुकसान है, यह भी सार्वजनिक हो। उपाध्याय ने कहा कि उत्तराखंड में खनन सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं है। इसका असर भूगर्भ, नदियों, सड़कों और सीमांत गांवों पर पड़ता है। “नियम बनें, लेकिन हिमालयी राज्यों की भागीदारी के साथ बनें।” उन्होंने साफ किया, “हम व्यवस्था के खिलाफ नहीं। पारदर्शिता चाहिए। लेकिन समानता के नाम पर उत्तराखंड के अधिकार कुर्बान न हों।”