सरकार खेल महोत्सवों में वाहवाही लूट रही, पहाड़ के स्कूलों में शारीरिक शिक्षक तक नहीं – प्रशिक्षित बेरोजगारों का आरोप
देहरादून । उत्तराखंड में शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित (B.P.Ed / http://M.P.Ed) बेरोजगारों का अनिश्चितकालीन धरना आज 106वें दिन और क्रमिक अनशन 91वें दिन में प्रवेश कर गया है, लेकिन धामी सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। प्रशिक्षित बेरोजगार विगत 106 दिनों से शिक्षा निदेशालय, ननूरखेड़ा, देहरादून में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। संगठन का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ रोजी-रोटी की नहीं, बल्कि पहाड़ के सरकारी स्कूलों की बदहाल शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई को उजागर करने की भी है।प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चंद्र पाण्डेय ने कहा कि एक तरफ सरकार खेल महोत्सव के जरिए प्रदेश के नौनिहालों की प्रतिभा पर अखबारों, टीवी और सोशल मीडिया में अपना गुणगान कर रही है, वहीं दूसरी तरफ हकीकत यह है कि प्रदेश के अधिकांश प्राथमिक से लेकर इंटर कॉलेज तक शारीरिक शिक्षकों के बिना वीरान पड़े हैं। दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में बच्चे अपने दम पर सफलता की कहानी लिख रहे हैं और सरकार उनकी उपलब्धियों पर अपना प्रचार कर रही है। पाण्डेय ने कहा, “106 दिन से धरना और 91 दिन से क्रमिक अनशन चल रहा है, फिर भी सरकार मौन है। यह वादाखिलाफी है। अगर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और लोकतांत्रिक तरीके से तेज किया जाएगा। सरकार को तत्काल संवाद कर समाधान की पहल करनी चाहिए।”
प्रशिक्षित बेरोजगारों की 4 प्रमुख मांगें –
1. नई शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रदेश के प्रत्येक प्राथमिक से लेकर प्रत्येक इंटरमीडिएट विद्यालय तक एक शारीरिक शिक्षक की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
2. उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित फाइल संख्या 77006 को शीघ्र कैबिनेट से मंजूरी दिलाकर नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ की जाए।
3. राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेजों में नई शिक्षा नीति के अनुरूप शारीरिक शिक्षा के व्यायाम प्रवक्ता (Lecturer) के पद सृजित किए जाएं।
4. वर्ष 2006 से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित बेरोजगारों को भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा में छूट प्रदान की जाए।
धरना स्थल पर प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चंद्र पाण्डेय के साथ महेश नेगी, भुवनेश बिष्ट, अनिल राज, संजय कोरंगा, गिरीश मिश्रा, विपिन भंडारी, अर्जुन लिंगवाल सहित दर्जनों प्रशिक्षित बेरोजगार मौजूद रहे।































