अल्मोड़ा। उत्तराखंड की राजनीति में कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे दलों के झंडे कपड़े के नहीं, वेल्क्रो के बने हैं। जहाँ जरूरत पड़ी, चिपका लो। जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र के जैंती में रविवार को हुई विशाल जनसभा में ठीक यही नजारा दिखा। कांग्रेस के वरिष्ठ दिग्गज और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के भतीजे दिनेश कुंजवाल ने दशकों पुराना ‘हाथ’ छोड़कर सीधे उत्तराखंड क्रांति दल UKD का पटका गले में डाल लिया। पटका पहनाने के लिए मंच पर खुद UKD के संस्थापक सदस्य काशी सिंह ऐरी और प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती मौजूद थे। तालियाँ भी खूब बजीं, नारेबाजी भी हुई और फोटो भी खिंचे।
कहते हैं कांग्रेस में ‘परिवार’ ही सबसे बड़ी विचारधारा है। तो जब परिवार का ही एक सदस्य ‘हाथ’ छोड़ दे, तो सवाल उठना लाजमी है। क्या टिकट का इंतजार करते-करते थक गए या फिर ‘हाथ’ ने ही साथ छोड़ दिया? जैंती की सभा ने साफ कर दिया कि पहाड़ में अब वंशवाद के नाम पर भी वोट नहीं, वजह चाहिए। भाजपा अभी इस पूरे ड्रामे को दूर से देखकर मुस्कुरा रही होगी। उनकी रणनीति साफ है – कांग्रेस टूटे, UKD मजबूत हो, और फायदा बीच वाले ले जाएं। लेकिन पहाड़ का मतदाता भी अब पुराना नहीं रहा। उसे पता है कि चुनाव से 6 महीने पहले होने वाली ‘क्रांति’ अक्सर सत्ता की सीढ़ी होती है, आंदोलन नहीं।

UKD के लिए दिनेश कुंजवाल का आना बड़ी बात है। एक तो कुंजवाल नाम का वजन, दूसरा जागेश्वर का समीकरण। काशी सिंह ऐरी और सुरेंद्र कुकरेती के लिए ये संदेश देने का मौका है कि UKD अब सिर्फ नारे नहीं, नेता भी जुटा रही है। सवाल ये है कि क्या ये नई भर्ती चुनाव तक टिकी रहेगी या फिर अगली जनसभा में फिर से पटका बदलेगा? जागेश्वर में अभी चुनाव दूर हैं, पर समीकरण पास आ गए हैं। कांग्रेस को अपने घर संभालने हैं, भाजपा को विपक्ष की टूट का फायदा भुनाना है और UKD को ये साबित करना है कि ये वापसी है या सिर्फ एक और राजनीतिक पलायन।
फिलहाल जैंती में एक बात तय है – यहाँ ‘हाथ’ कमजोर हुआ है, और ‘क्रांति’ ने पटका मजबूत कर लिया है। बाकी फैसला पहाड़ की जनता करेगी, मंच पर नहीं, बूथ पर।































