Home उत्तराखंड “नाग देवता फॉरेस्ट बचाओ”

“नाग देवता फॉरेस्ट बचाओ”

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बिना अनुमति हजारों पेड़ काटने की तैयारी पर स्थानीय लोगों का विरोध

पौड़ी । प्रकृति ही मानव जीवन और वन्यजीवों की आधार है। जिस देवदार, बांज और बुरांश से पहाड़ की साँसें चलती हैं, उसी जंगल को अब “सड़क चौड़ीकरण” के नाम पर काटने की तैयारी से पौड़ी में आक्रोश है। नाग देवता रेंज के बुआखाल से टेका तक लगभग 3 किमी क्षेत्र में बिना वैधानिक प्रक्रिया और बिना जनसूचना के हजारों पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कल 18 अगस्त को जंगल का निरीक्षण कर विरोध दर्ज कराया और पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर कटान रोकने का संकल्प लिया।

स्थानीय लोगों के अनुसार जिस सड़क को चौड़ी और सुंदर बनाने की बात कही जा रही है, उस पर खास ट्रैफिक नहीं है और यह केवल एक वैकल्पिक मार्ग है। इसके बावजूद देवदार, बांज, बुरांश, काफल सहित मिश्रित बहुमूल्य वन को चिन्हित किया गया है। वन क्षेत्र लगभग 80-90% घना है। कंडोलिया से नाग देवता तक देवदार का सघन जंगल है जहां से सैकड़ों जलस्रोत निकलते हैं। आगे बांज-बुरांश-काफल के जंगल जैव विविधता का प्रमुख केंद्र हैं। इसमें 400-500 साल पुराने पेड़ भी शामिल हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि ये जंगल पौड़ी के जलस्रोतों और माइक्रो-क्लाइमेट के आधार हैं। कटाई से जलस्रोतों पर असर के साथ भूस्खलन का खतरा भी बढ़ सकता है।

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डीएफओ को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी

विरोध करने वालों ने डीएफओ पौड़ी को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि:

  1. पेड़ों की कटाई तत्काल रोकी जाए।
  2. बिना प्रस्ताव के लगे कटान के निशानों की वैधानिक जिम्मेदारी तय हो।
  3. इकोलॉजिकल नुकसान की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
  4. सड़क चौड़ीकरण की आवश्यकता और प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट की जाए।

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते रोक नहीं लगी और जवाब नहीं मिला तो यह विरोध व्यापक आंदोलन में बदलेगा। स्थानीय लोगों का कहना है, “हमें विकास चाहिए, लेकिन हिमालय के विनाश की कीमत पर नहीं।” फिलहाल वन विभाग से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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हमें विकास चाहिए, हिमालय के विनाश की कीमत पर नहीं: शंकर सिंह बिष्ट

पहाड़ की साँसें जंगल से चलती हैं। देवदार, बांज, बुरांश और काफल सिर्फ पेड़ नहीं हैं, ये हमारे जलस्रोत, मिट्टी और जीवन हैं। पौड़ी के नाग देवता रेंज में बुआखाल से टेका तक 3 किमी में बिना अनुमति और बिना जानकारी हजारों पेड़ों पर कटान के निशान लगा दिए गए हैं। 400-500 साल पुराने पेड़ भी इस लिस्ट में हैं। ये जंगल कंडोलिया से नाग देवता तक सैकड़ों जलस्रोतों को जिंदा रखते हैं। 18 अगस्त को स्थानीय युवाओं ने जंगल का निरीक्षण किया और पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर कटान रोकने का संकल्प लिया। विकास चाहिए, लेकिन हिमालय को उजाड़कर नहीं। अगर समय रहते रोक नहीं लगी तो ये विरोध बड़ा आंदोलन बनेगा।