Home उत्तराखंड OSD के घर नोटों का ढेर, हरदा बोले माफ कर दो

OSD के घर नोटों का ढेर, हरदा बोले माफ कर दो

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चुनावी सिंपैथी का नया स्टंट?

उत्तराखंड में 2016 की VPDO भर्ती का भूत 11 साल बाद फिर लौट आया है। UKSSSC पेपर लीक कांड में ED ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के सबसे करीबी, उनके पूर्व ओएसडी के घर पर छापा मारकर 1.28 करोड़ का काला-सफेद हिसाब सामने रख दिया – 32 लाख कैश, 200.5 ग्राम सोने के सिक्के-चेन और Rolex-Rado-Piaget जैसी 12 लग्जरी घड़ियां।

और छापेमारी के ठीक एक दिन बाद, वही पुराना सीन – हरीश रावत सोशल मीडिया पर भावुक हो गए। उन्होंने लिखा – “नियुक्तियों और परीक्षाओं में गड़बड़ी हमारी आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। यदि मुझसे जाने-अनजाने में भी कोई ऐसा कृत्य हुआ है, जिससे हमारे राज्य के नौजवानों के भविष्य पर दुष्प्रभाव पड़ा है, तो उसके लिए मैं खुद को प्रताड़ना का पात्र मानता हूं। मैं राज्य के लोगों से इस चूक के लिए क्षमा चाहता हूं।” साथ में ऐलान किया – “हां मैं, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का सदस्य हूं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति का स्थाई आमंत्रित सदस्य हूं और मैं बहुत विनम्रता पूर्वक इन दोनों पदों से हटना चाहूंगा, क्योंकि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी मेरी वजह से नहीं आनी चाहिए।”

एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जनता के बीच माफी मांगते हुए नजर आ रहे हैं, हालांकि यह माफी उनके OSD पर हुई कार्रवाई के बाद सामने आई है। लेकिन सत्य यही है जब जनता ने विरोध किया था तब तो सत्ता में रहकर हरीश रावत ने पेपर लीक पर कार्यवाही नहीं की। सवाल सीधा है – जब शासन आपके हाथ में था, तब OMR शीटों में हेरफेर हो रहा था, तब युवाओं का भविष्य बिक रहा था, तब यह नैतिकता कहां सो गई थी? तब तो फाइलों पर दस्तखत हो रहे थे, अब ED की रेड पड़ी तो ‘लज्जित हूं’ का पोस्ट आ गया।

लेकिन जैसे-जैसे 2027 के चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जनता के बीच अपनी अलग पहचान स्थापित करने के लिए इस तरह के स्टंट करते दिखे हैं। हालांकि उन्होंने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है लेकिन आज भी वह कांग्रेस से ही जुड़े हैं। यह इस्तीफा है या सेफ गेम? पद छोड़ो, पार्टी में बने रहो, और सहानुभूति बटोरो।

बहरहाल इतना कहा जा सकता है कि 2022 का चुनाव कांग्रेस उत्तराखंड की सत्ता में काबिज हो सकती थी लेकिन कहीं न कहीं उनकी ‘मैं’ ने कांग्रेस को सत्ता पाने से काफी दूर लाकर खड़ा कर दिया। कांग्रेस हारी नहीं, हरदा की ‘मैं’ से हार गई। और एक बार फिर जब चुनाव नजदीक आ रहे हैं तो हरीश रावत पुनः किसी न किसी तरह लोगों के साथ जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं। फिर चाहे वह हालिया ताजा मामला उनके कांग्रेस से पद छोड़ने की ही बात क्यों न हो। यह बात हर कोई जानता है कि जब इनके शासनकाल के दौरान पेपर लीक का मुद्दा छाया था तो इन्होंने तत्काल कोई बड़ा एक्शन लेते हुए कार्यवाही में तेजी क्यों नहीं दिखाई। 11 साल तक चुप्पी और अब माफी?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उसी राह पर

बहरहाल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इसी पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की तर्ज पर ही काम कर रहे हैं, अगर उनके कुछेक आसपास के अधिकारियों की ही सही से सही समय पर जांच कर ली जाए तो उन्हें भी ज्ञात हो जाएगा कि निवेदन और शिकायती पत्र में क्या फर्क है और उनके आस-पास के अधिकारी उन्हें क्यों गुमराह कर रहे हैं। हालिया एक ताजा मामला मेरे संज्ञान में भी आया है किस तरह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आस-पास के ही कुछ अधिकारी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ही गुमराह कर जनता और मुख्यमंत्री के बीच गलतफहमी फैलाने का कार्य भी कर रहे हैं। बहरहाल इतना कहा जा सकता है कि इस सब का कसूर स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ही है कि वो अपने अधिकारियों पर इतना भरोसा करते हैं कि उन्हें ये ही नहीं मालूम कि निवेदन और शिकायती पत्र में फर्क क्या होता है।

बहरहाल पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कहानी एक जैसी ही है बस फर्क इतना है पूर्व मुख्यमंत्री को 11 वर्ष बाद ईडी द्वारा उनके ओएसडी के घर पर की गयी छापेमारी में पकड़े गये वित्त के बाद आम जनता से यह कहना पड़ रहा है कि मुझे माफ़ कर दो साथ ही पार्टी के पदों से भी स्वयं ही इस्तीफा देना पड़ रहा है तो समझ जाइए एक बार फिर चुनाव नजदीक है और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत उत्तराखंड की जनता के बीच खुद के लिए सिंपैथी जुटाने में लग गये है। लेकिन समय का असल मूल्य आज भी पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नहीं समझ पाए।