हल्द्वानी। केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों ने देश को आंदोलनों की आग में झोंक दिया है। यूजीसी का नया इक्विटी कानून अब गृह युद्ध के संकेत दे रहा है। आज देश का एक भी राज्य ऐसा नहीं जहां सड़कों पर छात्र, युवा और समाज विरोध में न उतरा हो। यूजीसी जैसे काले कानून के साथ भ्रष्टाचार, महंगाई और तुष्टिकरण की नीतियों ने जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। इसी आक्रोश की गूंज बुधवार को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क, तिकोनिया चौराहे पर सुनाई दी। समस्त सवर्ण समाज ने एस.सी./एस.टी. और यूजीसी के काले कानून के विरोध में सवर्ण महापंचायत एवं विशाल धरना प्रदर्शन कर सरकार को खुली चेतावनी दी। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं – “योग्यता का सम्मान करो”, “हम रहेंगे मौन तो आवाज उठाएगा कौन”, “यदि सवर्णों को दबाओगे तो नर्क में जाओगे” – जो सरकार की नीतियों पर सीधा कटाक्ष थीं।

धरने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में तीन मुख्य मांगें रखी गईं – यूजीसी इक्विटी नियमों को तत्काल रद्द किया जाए, एस.सी./एस.टी. एक्ट के कथित दुरुपयोग पर रोक लगे और आरक्षण जाति नहीं, आर्थिक आधार पर हो। इस दौरान कार्यक्रम संयोजकों ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, “सरकार सुन ले, अगर हमारी मांगें नहीं मानी तो सवर्ण समाज आजादी के बाद की सबसे बड़ी क्रांति करेगा।” उन्होंने बताया कि शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप जंतर-मंतर पर युवाओं के सुरक्षा कवच बने हुए हैं और हाईकोर्ट में शांतिपूर्ण धरने की अनुमति के लिए याचिका दायर की गई है। दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे 500 से अधिक युवाओं पर लाठीचार्ज कर सरकार ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है। हल्द्वानी के इस महाधरने में सैकड़ों सवर्ण पहुंचे। वक्ताओं ने कहा कि जब तक सरकार काले कानून वापस नहीं लेती, लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा। बहरहाल सरकार सवर्ण और एस.सी./एस.टी. में फूट डालकर सामाजिक प्रेम खत्म कर रही है। आरक्षण जाति नहीं, आर्थिक आधार पर हो, जिससे हर जाति के गरीब को बराबर अवसर मिले।

इस दौरान धरने में भुवन भट्ट, प्रकाश हरबोला, अमित चौहान, विनोद पाठक, दीपक जोशी, तरुण वानखेड़े, पीयूष जोशी, हरीश रावत, संदीप पांडे, नवीन पंत, डॉ. आशुतोष पंत, मदन मोहन जोशी, हेमचंद्र भट्ट, बालम जोशी, गिरीश सत्यवाली, वैभव जोशी, मनोज बिष्ट, ज्ञानेंद्र जोशी, सीमा बत्रा, नितिन कोहली, तेज सिंह सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।































