Home उत्तराखंड कुम्भ करेगा गुजरात का तारण…

कुम्भ करेगा गुजरात का तारण…

1064

सतीकुंड का कायाकल्प 5 करोड़ का, बिल 61 करोड़ का। “ये आस्था का मेला नहीं, अपनों को उपकृत करने का ठेला है”

हरिद्वार। अर्धकुंभ 2027 की आहट के साथ ही उत्तराखंड सरकार ने आस्था के नाम पर विकास की गंगा नहीं, बल्कि नोटों की गंगा बहा दी है। कुल 1527 करोड़ का बजट पास। उसमें राज्य का 1027 करोड़ + केंद्र का *500 करोड़।लेकिन जैसे ही बजट की पोटली खुली, वैसे ही सवालों का सैलाब भी आ गया।भाजपा के ही पूर्व नेता और गंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने सबसे पहले बम फोड़ा। उनका आरोप है कि कुंभ के सारे “बड़े-बड़े” ठेके सीधे गुजरात की कंपनियों की झोली में जा रहे हैं। और सबसे महंगा तोहफा मिला है सतीकुंड जीर्णोद्धार को। त्रिपाठी जी का गणित सीधा है –
काम की लागत = 5 करोड़ , सरकार का ठेका = 61 करोड़
बाकी के 56 करोड़? शायद कुंड में “डुबकी लगाने के लिए सोने की सीढ़ियां” बनेंगी।

“लगता है ये कुंभ अब आस्था के लिए नहीं, ‘अपनों को उपकृत’ करने के लिए लगाया जा रहा है। सरकार श्वेत पत्र जारी करे और बताए कि उत्तराखंड के ठेकेदारों का क्या कसूर था जो गुजरात से ठेकेदार बुलाने पड़े?”

धामी सरकार का दावा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि कुंभ 2027 को “दिव्य और भव्य” बनाया जाएगा। काम समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्ता के साथ होगा। मेलाधिकारी भी कह रही हैं “गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं”। लेकिन जनता पूछ रही है: पारदर्शिता 61 में से 5 घटाने पर ही क्यों अटक गई? कुंभ में स्नान तो श्रद्धालु करेंगे, लेकिन ठेकों में गोता कौन लगा रहा है ये अब सरकार को बताना पड़ेगा। वरना 2027 में तीन शाही स्नान के साथ चौथा “शाही हिसाब” भी लगना तय है। अब गेंद पूरी तरह सरकार के पाले में है। देखना है वो इसे छक्के के लिए भेजती है या विकेट दे देती है।