एलटी शिक्षकों के लिए टीईटी की बाध्यता हटाने की मांग
हल्द्वानी। राजकीय शिक्षक संघ, उत्तराखंड शाखा जनपद नैनीताल के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश से उनके आवास पर मुलाकात कर एलटी शिक्षकों के लिए टीईटी की बाध्यता समाप्त करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। संघ के पदाधिकारियों ने विधायक को बताया कि प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत एलटी शिक्षकों की नियुक्ति सेवा नियमावली के तहत निर्धारित शैक्षिक एवं व्यावसायिक योग्यताओं के आधार पर हुई है। कई शिक्षक लंबे समय से निष्ठा के साथ सेवाएं दे रहे हैं। संघ का कहना है कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों पर नई टीईटी बाध्यता लागू करने से उनकी सेवा, पदोन्नति और सेवा-सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। 50 से 55 वर्ष की उम्र के शिक्षकों के लिए इस स्तर पर परीक्षा देना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा।ज्ञापन लेने के बाद विधायक सुमित हृदयेश ने टीईटी की बाध्यता को “शिक्षकों के प्रति तुगलकी फरमान” करार दिया। उन्होंने कहा, “जिन शिक्षकों ने नियमों के तहत नियुक्त होकर अपना पूरा जीवन शिक्षा को समर्पित किया है, उनसे इस उम्र में दोबारा परीक्षा की अपेक्षा करना अन्याय है। हजारों छात्रों का भविष्य गढ़ने वाले शिक्षकों की योग्यता पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित नहीं।” विधायक ने कहा कि सरकार को मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए पूर्व से कार्यरत एलटी शिक्षकों को टीईटी से छूट देनी चाहिए। उन्होंने संघ को आश्वस्त किया कि शिक्षकों की इस जायज मांग को आगामी विधानसभा सत्र में मजबूती से उठाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर शासन स्तर पर भी पैरवी की जाएगी। “शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं। उनके अनुभव का सम्मान होना चाहिए, सेवा के अंतिम पड़ाव पर उनके सामने नई बाधाएं नहीं खड़ी की जानी चाहिए,” विधायक ने कहा। इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष मदन गोस्वामी के नेतृत्व में मंडलीय उपाध्यक्षा प्रीति मजगाई, डॉ. गोकुल मर्तोलिया, डॉ. विवेक पाण्डेय, हेम त्रिपाठी, पान सिंह मेहता, मीनाक्षी कीर्ति, रश्मि पांडे, गणेश जोशी, धीरेन्द्र मिश्रा, त्रिलोक ब्रजवासी, कुलदीप जोशी, जगदीश कुमार विमल, बलवंत हयांकी और कृष्ण सोनाल सहित संघ के कई पदाधिकारी मौजूद रहे।































