11 पुस्तकों का हुआ भव्य विमोचन
उत्तराखंड के रचनाकारों की पाँच कृतियों ने बढ़ाया देवभूमि का साहित्यिक गौरव
किशनगढ़ (अजमेर)। “सेवा से संवेदना तक” की भावना को आत्मसात करते हुए सम्पर्क संस्थान की 25 वर्षों की गौरवशाली यात्रा का रजत जयंती महोत्सव किशनगढ़ की धरती पर साहित्य, संस्कृति, सेवा और सामाजिक सरोकारों के भव्य संगम के रूप में आयोजित किया गया। रजत महोत्सव के अवसर पर देशभर से आए साहित्यकारों की 11 पुस्तकों का गरिमामय विमोचन किया गया। इनमें उत्तराखंड के रचनाकारों की पाँच कृतियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।

महोत्सव का शुभारंभ शनिवार, 8 अगस्त 2026 को प्रातः 10:30 बजे अरसेन विहार, अजमेर रोड, मदनगंज-किशनगढ़ (अजमेर) में हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में किशनगढ़ विधायक डॉ. विकास चौधरी, रोजियम ग्रुप के चेयरमैन श्री अर्पित जैन तथा किशनगढ़ मार्बल एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री सुधीर जैन उपस्थित रहे।

सम्पर्क संस्थान की रजत जयंती का यह आयोजन संस्था की 25 वर्षों की सामाजिक, साहित्यिक एवं सेवाभावी यात्रा का उत्सव रहा। विभिन्न प्रदेशों से आए साहित्यकारों और रचनाकारों ने अपनी सृजनात्मक उपस्थिति से समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की।
उत्तराखंड की पाँच कृतियों का हुआ विमोचन
समारोह में ललिता कापड़ी (हल्द्वानी, उत्तराखंड) के काव्य संग्रह ‘मैं ख़्वाब देखती हूँ’ एवं गद्य संग्रह ‘ठहर कर देखो ज़रा’ तथा शशि कुड़ियाल (देहरादून, उत्तराखंड) के काव्य संग्रह ‘कुछ दिल ने कहा’ एवं कहानी संग्रह ‘सात फेरे’ का विमोचन किया गया। इनके साथ स्मिता साह ‘शायराना स्वयं’ (हल्द्वानी) के शायरी संग्रह ‘शायराना स्वयं’ ने भी उत्तराखंड की साहित्यिक उपस्थिति को सशक्त बनाया।

अन्य विमोचित पुस्तकों में रेनू शब्दमुखर (जयपुर) का साझा काव्य संग्रह ‘स्त्री स्वर : मौन से मुखर तक’, सुनीता त्रिपाठी (जयपुर) का ‘दृष्टिमन भाग-4’, रसिका शर्मा (जयपुर) की ‘जिद जिसने मुक़ाम दिलाया’, डॉ. नमिता चौहान (जयपुर) की ‘मौन झंकृति’, किशन राठी की ‘मैं से हम की ओर’ तथा आर.जे. रवींद्र की ‘वज़ीर’ शामिल रहीं।

इन पुस्तकों का एक मंच पर विमोचन देश के विभिन्न अंचलों की साहित्यिक संवेदनाओं के मिलन का प्रतीक बना। राजस्थान की धरती पर उत्तराखंड के रचनाकारों की कृतियों को मिला यह मंच दोनों प्रदेशों की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक निकटता को भी दर्शाता है।

सेवा, संवेदना और साहित्य का 25 वर्षों का सफर
सम्पर्क संस्थान ने अपनी 25 वर्षों की यात्रा में साहित्य, शिक्षा, समाजसेवा और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े विभिन्न कार्यों के माध्यम से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। रजत जयंती महोत्सव इसी निरंतर यात्रा का उत्सव है, जिसमें साहित्य को समाज से जोड़ने और रचनाकारों को सम्मानजनक मंच प्रदान करने की प्रतिबद्धता दिखाई दी।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में सम्पर्क संस्थान अध्यक्ष अनिल लढ़ा, महासचिव सुनील अग्रवाल, समन्वयक महासचिव रेनू ‘शब्दमुखर’, कार्यक्रम संयोजक डॉ. अखिल शुक्ला एवं उपाध्यक्ष विमल चौहान सहित सम्पर्क परिवार के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। रजत महोत्सव ने यह संदेश दिया कि जब सेवा संवेदना से जुड़ती है और संवेदना साहित्य में अभिव्यक्त होती है, तब समाज के लिए एक ऐसी सकारात्मक यात्रा का निर्माण होता है, जो आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देती है।































