उत्तराखंड के शारीरिक शिक्षा शिक्षक 16 अगस्त को करेंगे गांधी पार्क से शिक्षा मंत्री आवास घेराव
देहरादून। जब तानाशाही चरम पर पहुंच जाए तो लोकतंत्र की आवाजें भी बहरी हो जाती हैं। 72 दिन से सड़क पर बैठे लोगों की मांगों पर ध्यान देने के बजाय धामी सरकार अपने चेहरे चमकाने और स्वहित साधने में जुटी है। सत्ता का फोकस जनता से हटकर सिर्फ उन योजनाओं पर है जिनसे उसे सीधा फायदा दिख रहा है। ऐसे में सवाल उठता है, सरकार किसके लिए है? बहरहाल उत्तराखंड के शारीरिक शिक्षा शिक्षकों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बेरोजगार शारीरिक (व्यायाम) प्रशिक्षित शिक्षक 16 अगस्त को देहरादून के गांधी पार्क से शिक्षा मंत्री के आवास तक घेराव कार्यक्रम करेंगे। शिक्षा निदेशालय ननूरखेड़ा में इनका अनिश्चितकालीन धरना 4 जून से चल रहा है। आज धरने का 72वां दिन है और क्रमिक अनशन का 57वां दिन है। आंदोलनकारियों का कहना है कि इतने लंबे समय से प्रदर्शन के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई है। क्रमिक अनशन में प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चंद्र पाण्डेय के साथ संजय कोरंगा, प्रकाश चंद्र और योगंबर नेगी आदि बैठे हैं।
प्रमुख मांगें
- नई शिक्षा नीति के तहत नियुक्ति: प्राथमिक विद्यालय से लेकर इंटरमीडिएट तक सभी विद्यालयों में शारीरिक शिक्षा शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य की जाए।
- फाइल संख्या 77006: उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षक पदों से संबंधित फाइल को वित्त विभाग से मंजूरी दिलाकर कैबिनेट में पास किया जाए।
- आयु सीमा में छूट: शारीरिक शिक्षा शिक्षकों को भर्ती में आयु सीमा में छूट दी जाए।
प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चंद्र पाण्डेय ने कहा कि सरकार यदि जल्द निर्णय नहीं लेती है तो शिक्षक बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।































