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खड़गे के खड़कने से पहले खड़गे कांग्रेसी

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हल्द्वानी । राष्ट्रीय अध्यक्ष के आने से पहले ही उत्तराखंड कांग्रेस खुद ही “खड़ग” उठा बैठी। मल्लिकार्जुन खड़गे की आज हल्द्वानी में प्रस्तावित रैली से पहले शनिवार सुबह कांग्रेस नेताओं और पुलिस के बीच ऐसा टकराव हुआ कि रैली का मंच सजने से पहले सड़क पर ही धरना सज गया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि रैली में आने वाली बसों की पुलिस ने जगह-जगह जबरन चेकिंग शुरू कर दी। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत कई विधायक और सैकड़ों कार्यकर्ता आरोप लेकर सीधे एसएसपी कार्यालय पहुंच गए। वहां जमकर नारेबाजी हुई और कार्यालय के बाहर धरना दे दिया गया।

नेताओं ने साफ कहा कि एसएसपी मंजुनाथ टीसी के “इशारे” पर ही रैली को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। भीड़ रोकने के बहाने कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंचने दिया जा रहा। हंगामा इतना बढ़ा कि नेताओं ने एसएसपी को सीधे “मुख्यमंत्री का एजेंट” तक बता डाला। करीब एक घंटे तक चले इस ड्रामे के बाद एसपी क्राइम जगदीश चंद्र मौके पर पहुंचे। उन्होंने नेताओं से बातचीत कर भरोसा दिलाया कि रैली में आने वाले लोगों को “अनावश्यक रूप से” नहीं रोका जाएगा। इसके बाद ही कांग्रेसियों का गुस्सा थोड़ा ठंडा हुआ।

चुनाव से पहले अचानक उत्तराखंड याद आया

बहरहाल, एक तरफ सोशल मीडिया पर पिछले कुछ समय से कांग्रेस के अंदर अनुशासन की कमी और आपसी खींचतान की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं। टिकट से लेकर पद तक हर मुद्दे पर सार्वजनिक बयानबाजी आम हो गई है। वहीं दूसरी तरफ जैसे ही चुनाव नजदीक आया, राष्ट्रीय अध्यक्ष की रैली के साथ कांग्रेस को अचानक उत्तराखंड याद आ गया। मंच से संविधान और जनहित की बात होगी, लेकिन मंच तक पहुंचने के लिए पहले पुलिस से ही “संवाद” करना पड़ा। कांग्रेस कह रही है कि यह लोकतंत्र पर हमला है। प्रशासन कह रहा है कि यह सुरक्षा जांच है। बीच में फंसे कार्यकर्ता बस में बैठे-बैठे यही सोच रहे होंगे कि खड़गे साहब खड़कें उससे पहले पार्टी खुद ही न खड़क जाए।

रैली अभी होनी है। मंच पर भाषण में कितनी बिजली गिरेगी, यह देखना बाकी है। लेकिन आज सुबह हल्द्वानी में जो सियासी शॉर्ट-सर्किट हुआ, उसने बता दिया कि चुनावी मौसम आते ही कांग्रेस में ऊर्जा की कमी नहीं, बस दिशा तय करने में थोड़ी दिक्कत है।