जाति प्रमाण-पत्र के लिए 5 महीने से भटक रहे अनाथ बच्चे, सांसद अजय भट्ट की फटकार के बाद हरकत में आया तहसील प्रशासन
हल्द्वानी। दो अनाथ बच्चों के जाति प्रमाण-पत्र का मामला सांसद अजय भट्ट के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। दिया कश्यप और विनय कश्यप पिछले करीब 5 महीनों से जाति प्रमाण-पत्र के लिए तहसील, पटवारी और अन्य कार्यालयों के चक्कर काट रहे थे। परिवार का आरोप है कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार जांच कर प्रमाण-पत्र जारी किया जा सकता था, लेकिन आवेदन को बार-बार निरस्त / लंबित किया जाता रहा। इस संबंध में परिवार की ओर से 3 सितंबर 2026 को उप जिलाधिकारी हल्द्वानी को लिखित शिकायत दी गई। शिकायत में बताया गया कि दोनों बच्चों ने बचपन में ही माता-पिता को खो दिये थे, जिसके बाद उनके मामा राजीव कश्यप ने उनका पालन-पोषण किया। परिवार ने पुराने राजस्व, भूमि, पहचान सहित सभी संबंधित दस्तावेज प्रशासन को सौंपे हैं। वहीं समाजसेवी और आरटीआई एक्टिविस्ट हेमन्त गौनिया ने बताया कि उक्त मामला अति गम्भीर है, जिस पर उनके द्वारा भी हस्तक्षेप किया जा रहा है।
सांसद ने फोन पर लगाई फटकार
मामला सांसद अजय भट्ट तक पहुंचने पर उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए उप जिलाधिकारी हल्द्वानी और तहसीलदार हल्द्वानी को फोन कर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए। सांसद ने अनाथ बच्चों को अनावश्यक रूप से चक्कर कटवाए जाने पर नाराजगी जताई। सांसद के फोन के बाद तहसील प्रशासन सक्रिय हुआ और तहसीलदार कार्यालय से राजीव कश्यप को फोन कर तत्काल कार्यालय बुलाया गया और आवश्यक दस्तावेज मांगे गए।
समाजसेवी हेमंत सिंह गोनिया कर रहे सहयोग
इस पूरे मामले में समाजसेवी हेमंत सिंह गोनिया लगातार परिवार के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रमाण-पत्र का मामला नहीं, बल्कि दो अनाथ बच्चों के भविष्य का सवाल है। जाति प्रमाण-पत्र न होने से बच्चों को शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले दोनों बच्चों को स्थायी निवास प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए भी लगभग 5 साल तक भटकना पड़ा था। तब भी समाजसेवी हेमंत सिंह गोनिया और सांसद अजय भट्ट के प्रयासों से ही प्रमाण-पत्र जारी हो पाए थे।
15 दिन की समय-सीमा, फिर भी 5 महीने तक लटका रहा मामला
उत्तराखंड सेवा का अधिकार अधिनियम के अनुसार जाति प्रमाण-पत्र और स्थायी निवास प्रमाण-पत्र दोनों सेवाओं के लिए कुल निर्धारित समय-सीमा 15 कार्य दिवस है। प्रक्रिया में राजस्व उप निरीक्षक, राजस्व निरीक्षक और तहसीलदार की भूमिका तय है, जबकि प्रथम अपीलीय अधिकारी उप जिलाधिकारी और द्वितीय अपीलीय अधिकारी जिलाधिकारी हैं। नियमानुसार निर्धारित समय में सेवा न मिलने या आवेदन निरस्त होने पर आवेदक अपील कर सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कानून में समय-सीमा तय होने के बावजूद 5 महीने तक अनाथ बच्चों के आवेदनों का निस्तारण क्यों नहीं हुआ। सांसद के हस्तक्षेप के बाद अब परिवार को उम्मीद है कि दोनों बच्चों के जाति प्रमाण-पत्रों का शीघ्र नियमानुसार निस्तारण होगा।































