जांच में मदर डेयरी, मधुसूदन, परम फेल
हल्द्वानी। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर 05 अगस्त 2026 को सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा ए.एस. रावत के नेतृत्व में हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र में छापेमारी कर विभिन्न कंपनियों के दूध के नमूने उठाए गए थे, जिनकी रिपोर्ट अब राज्य खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला रुद्रपुर से आई है और रिपोर्ट ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है, दरअसल जांच में 5 नमूने अधोमानक पाए गए हैं जिनमें परम स्टैंडर्ड मिल्क में 4.5 प्रतिशत फैट की जगह 3.75 प्रतिशत, मधुसूदन काऊ मिल्क में फैट और एसएनएफ दोनों कम, हेल्थवेज स्टैंडर्ड मिल्क में फैट 4.27 और एसएनएफ 7.21 प्रतिशत, गाय व भैंस के खुले मिक्स दूध में सबसे बड़ी गड़बड़ी जहां 4.5 प्रतिशत फैट की जगह सिर्फ 2.96 और 8.5 एसएनएफ की जगह 6.59 प्रतिशत, वहीं मदर डेयरी काऊ मिल्क में 3.2 की जगह 3.04 प्रतिशत फैट पाया गया है, खास बात ये है कि लैब में किसी भी नमूने में स्टार्च, शुगर, यूरिया, नमक, वनस्पति या सिंथेटिक रंग नहीं मिला है यानी मिलावट नहीं बल्कि सीधे-सीधे फैट और एस.एन.एफ. की चोरी कर दूध को पतला कर बेचा जा रहा था, यानि ब्रांड बड़ा है पर फैट छोटा है, जनता दाम तो स्टैंडर्ड का दे रही है पर पी रही है सफेद पानी, फिलहाल खाद्य सुरक्षा विभाग ने सभी कारोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है।
जब नैनीताल में ही 5 ब्रांड फेल, तो बाकी जिलों में क्या परोसा जा रहा है?
नैनीताल जैसे जागरूक जिले में जब परम, मदर डेयरी और मधुसूदन जैसे ब्रांडेड दूध के सैंपल फेल हो गए, तो सोचिए प्रदेश के बाकी जिलों में क्या हाल होगा जहाँ जांच ही नहीं होती? सबसे बड़ा सवाल ये नहीं कि दूध में क्या मिला, सवाल ये है कि यह खेल कब से चल रहा है? क्या महीनों से जनता दाम पूरे देकर आधा दूध पी रही थी? फैट चोरी का ये फॉर्मूला एक दिन में तो बना नहीं होगा। अब जरूरत सैंपल फेल करने की नहीं, सप्लाई चेन की गहन जांच की है – दूध डेयरी से निकलकर पैकेट तक आते-आते पतला कैसे हो गया?































