24 को देहरादून में नर्सिंग महापंचायत
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल से इस्तीफे की मांग, वर्षवार भर्ती लागू करने पर जोर
हल्द्वानी। उत्तराखंड में नर्सिंग भर्ती को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। हल्द्वानी में गुरुवार को किसान मंच उत्तराखंड और नर्सिंग अभ्यर्थियों की संयुक्त प्रेस वार्ता में किसान मंच ने अभ्यर्थियों के वर्षवार भर्ती आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। साथ ही 24 जुलाई को देहरादून के बुद्ध पार्क में “नर्सिंग महापंचायत” आयोजित करने का ऐलान किया गया।किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष किसान पुत्र कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश के हजारों नर्सिंग अभ्यर्थी वर्षों से न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार लगातार टालमटोल कर रही है। उन्होंने सरकार से वर्षवार भर्ती प्रक्रिया तत्काल लागू करने की मांग करते हुए कहा कि यदि सरकार युवाओं को न्याय नहीं दे सकती तो स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। कार्तिक उपाध्याय ने देहरादून में स्वास्थ्य मंत्री के सरकारी आवास के बाहर चार नर्सिंग अभ्यर्थियों द्वारा फिनाइल पीने की घटना को “दुखद और शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता” बताया। उन्होंने कहा कि यह पूरे उत्तराखंड के लिए चेतावनी है। “यह केवल नर्सिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य और न्यायपूर्ण भर्ती व्यवस्था की लड़ाई है,” उन्होंने कहा।अभ्यर्थियों में इंगिता रुंगवाल ने कहा कि संघर्ष किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, पारदर्शी भर्ती के लिए है। वर्षवार भर्ती से ही हजारों युवाओं को समान अवसर मिलेगा। वहीं जया ने भी कहा कि हमने हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से बात रखी, लेकिन सुना नहीं गया। अब प्रदेशभर के अभ्यर्थी एकजुट होकर निर्णायक संघर्ष करेंगे। सभी से बुद्ध पार्क में पहुंचने की अपील। साथ ही उमा ने भी कहा कि किसी युवा को आत्मघाती कदम उठाने की नौबत न आए। सरकार संवेदनशीलता दिखाते हुए विसंगतियों का तुरंत समाधान करे।

वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। किसान मंच ने कहा कि जरूरत पड़ी तो किसानों, कर्मचारियों, महिलाओं और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर इसे प्रदेशव्यापी बनाया जाएगा। 24 जुलाई को देहरादून में होने वाली नर्सिंग महापंचायत में प्रदेशभर के अभ्यर्थी, छात्र-युवा, किसान संगठन और सामाजिक संगठन भाग लेंगे। यहीं से आंदोलन की आगे की रणनीति तय होगी।





























