सरकार के लिए “अढ़ाई कोस” भी तय करना मुश्किल
“9 दिन चले अढ़ाई कोस” वाली कहावत चरितार्थ कर रही धामी सरकार की नौकरशाही
देहरादून। जिन राज्य आंदोलनकारियों ने अपने आंदोलन से इस राज्य को बनाया, आज वही आंदोलनकारी अपना हक मांगने के लिए 131 दिन से शहीद स्मारक पर धूल फांक रहे हैं और सरकार है कि कैबिनेट दर कैबिनेट सिर्फ तारीख पर तारीख दिए जा रही है। 15 जून 2026 से नियुक्ति की मांग को लेकर धरने पर बैठे इन आंदोलनकारियों को 2013 से नियुक्ति का झुनझुना थमाया जा रहा है। मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव तक, सबने आश्वासन की घुट्टी तो पिला दी, पर फाइल आज तक कैबिनेट तक नहीं पहुंच पाई।
मुख्य सचिव का वादा भी जुमला निकला!
मंच संयोजक अम्बुज शर्मा ने बताया कि 14 सितंबर 2026 को मुख्य सचिव आनंदवर्धन और गृह सचिव शैलेश बगौली ने साफ कहा था – “अगली कैबिनेट में मामला आएगा, उप-समिति बनेगी।” आंदोलनकारियों ने भरोसा कर अनशन भी तोड़ दिया।उस “अगली कैबिनेट” को आए हुए अब 4 कैबिनेट बीत चुकी हैं, लेकिन सरकार के लिए वो “अगली कैबिनेट” अभी तक आई ही नहीं। आखिर फाइलों में ऐसा कौन सा जाम लगा है जो 131 दिन में भी नहीं खुल रहा? अब सवाल यह है कि जब राज्य बनाने वालों की ही नहीं सुनी जा रही, तो आम पहाड़ी की कौन सुनेगा? आंदोलनकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है – यदि अगली कैबिनेट में भी उनकी मांग नहीं लाई गई तो वे सामूहिक आत्मघाती कदम उठाएंगे। और तब इसकी पूरी जिम्मेदारी इस सुस्त और संवेदनहीन शासन-प्रशासन की होगी।
































