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उत्तराखंड में 1000 करोड़ की बिजली गायब

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8 शहरों में सबसे ज्यादा लॉस, सरकार ने शुरू किया सख्त अभियान

देहरादून। देवभूमि जैसे छोटे राज्य में सालाना करीब 1000 करोड़ रुपये की बिजली चोरी / लाइन लॉस का मामला सामने आया है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) की टैरिफ ऑर्डर रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है, जिसके बाद धामी सरकार ने ऊर्जा विभाग को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के 122 सब-डिवीजनों में से सिर्फ 8 शहरों का एटीएंडसी लॉस बाकी 114 शहरों पर भारी पड़ रहा है। इन 8 शहरों में लक्सर, लंढौरा, मंगलौर, सितारगंज, खटीमा, गदरपुर, जसपुर और जोशीमठ शामिल हैं, जहां लाइन लॉस 27% से लेकर 69% तक पहुंच गया है। सबसे ज्यादा नुकसान हरिद्वार जिले के रुड़की सर्किल में बताया जा रहा है, जहां अकेले करीब 900 मिलियन यूनिट का लॉस है, जिसकी कीमत 500 करोड़ से अधिक आंकी गई है।

लगातार बढ़ रहा है लॉस

  • 2021-22 में डिस्ट्रीब्यूशन लॉस 14.70%
  • 2022-23 में बढ़कर 16.39%
  • 2023-24 में 15.63%

आयोग ने ऊर्जा निगम को साफ कहा है कि हर हाल में इस लॉस को कम किया जाए, इसके लिए एनर्जी ऑडिट और नियमित निगरानी की जाएगी।

ईमानदार उपभोक्ता पर बोझ

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस चोरी / लॉस का सीधा खामियाजा उन ईमानदार उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है जो नियमित बिल भरते हैं, क्योंकि निगम को महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है।

छापेमारी तेज, तकनीक का सहारा

बिजली चोरी रोकने के लिए ऊर्जा विभाग ने पुलिस फोर्स के साथ संयुक्त अभियान शुरू किया है। UPCL कुमाऊं चीफ शेखर त्रिपाठी ने बताया कि जैसे-जैसे फोर्स मिल रही है, हल्द्वानी, रामनगर, काशीपुर में कार्रवाई कर 250 से अधिक बिजली चोरी के केस दर्ज किए गए हैं। विभाग ने ट्रांसफार्मर स्तर पर चोरी पकड़ने के लिए ड्यूल मीटर लगाना शुरू कर दिया है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि करोड़ों का लॉस सरकार पर आर्थिक भार है, इसे रोकना ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी है और इसके लिए सख्ती जरूरी है।