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लोगों के कीमती समय पर कैंची की मार, श्रद्धा के नाम पर अराजकता

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भवाली / नैनीताल। इन दिनों पितृपक्ष चल रहा है और छुट्टियों के चलते बाबा नीम करौली महाराज के धाम कैंची में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। कहावत है भीड़ में भेड़चाल, कुछ ऐसा ही नजारा शनिवार को कैंची धाम में देखने को मिला, जब अचानक हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूरे धाम को जाम कर दिया। आलम यह रहा कि जो जहां था, वहीं ठहर गया। श्रद्धालु बाबा के दर्शन की ऐसी जल्दी में थे कि उन्होंने अनुशासन को ताक पर रख दिया। ना कोई लाइन, ना कोई नियम। बस पहले मैं, पहले मैं की होड़ में वाहनों के पहिए जाम कर दिए गए। श्रद्धा के नाम पर सड़क पर अतिक्रमण कर बैठे ये लोग भूल गए कि अति हर चीज की बुरी होती है।

सबसे बड़ा सवाल नैनीताल पुलिस की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। जब हजारों लोग सड़क पर थे, तो पुलिस प्रशासन कहां सो रहा था? यह कहावत चरितार्थ हो गई कि बाड़ ही खेत को खाने लगे तो रखवाली कौन करे। जिला पुलिस की लचर व्यवस्था के चलते पूरा भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग घंटों तक रेंगता रहा।

इस जाम की कैंची ने आम लोगों के कीमती समय पर ऐसी मार मारी कि कई लोगों की ट्रेन छूट गई, बसें छूट गईं। यहां तक कि एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी इस जाम में फंसकर कराहती रहीं। लेकिन हैरानी की बात है कि इस अराजकता फैलाने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि उन्हें ‘श्रद्धालु’ का नाम देकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया। सच तो यह है कि नैनीताल जिला पुलिस प्रशासन इस अव्यवस्था को संभालने में पूरी तरह फेल साबित हुआ है। लेकिन जब अपना ही सिक्का खोटा हो तो परखने वाले को क्या दोष देना, कार्रवाई करेगा कौन? जिले में तैनात अधिकारियों के रसूख के आगे सब ऊँची दुकान फीके पकवान साबित हो रहे हैं।

कुल मिलाकर एकाएक आए इस हुजूम ने, चाहे उसे श्रद्धालु कहें या अराजक तत्व, न सिर्फ यातायात व्यवस्था की कमर तोड़ दी, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि लापरवाही की इंतहा क्या होती है। समस्या गंभीर है, पर अंधेर नगरी चौपट राजा वाली स्थिति में कार्रवाई की उम्मीद करना भी बेमानी है।