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इंसानियत की मिसाल: अनाथ हुई 13 वर्षीय भावना के लिए सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल के स्टाफ ने जुटाए 20 हजार

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सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी और प्रशासन की मदद से बच्ची सुरक्षित पहुंची पिथौरागढ़

हल्द्वानी। विपदा की घड़ी में जब अपने भी साथ छोड़ देते हैं, तब समाज का मानवीय चेहरा ही एकमात्र उम्मीद बनकर उभरता है। हल्द्वानी के सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल में एक ऐसी ही हृदयविदारक घटना के बीच इंसानियत की एक अद्भुत मिसाल देखने को मिली। पिछले दो-तीन महीनों से अपनी बीमार माँ की अकेले तीमारदारी कर रही 13 वर्षीय बेसहारा बच्ची को, माँ के निधन के बाद, सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल के कर्मचारियों, स्थानीय प्रशासन और सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी के सामूहिक प्रयासों से उसके घर पिथौरागढ़ तक सुरक्षित रवाना किया गया। सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल के स्टाफ ने दरियादिली दिखाते हुए न केवल एंबुलेंस का खर्च उठाया, बल्कि बच्ची को लगभग 15 से 20 हजार रुपये की बड़ी आर्थिक सहायता भी प्रदान की।
पिथौरागढ़ जिले के ग्राम बाकरी निवासी 37 वर्षीय पूजा धामी पिछले दो-तीन महीनों से सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल में भर्ती थीं। इस घटना का सबसे मार्मिक पहलू यह है कि इस पूरी अवधि के दौरान कैंसर अस्पताल में उनकी देखरेख केवल उनकी 13 वर्षीय बेटी भावना ही कर रही थी। मृतका के पति, लगभग 55 वर्षीय गोविंद सिंह धामी, रीढ़ की हड्डी टूटने के कारण पिथौरागढ़ में ही बिस्तर पर पड़े हैं और चलने-फिरने में पूरी तरह अक्षम हैं। इस भीषण त्रासदी के बीच घर पर भावना के अलावा उसकी 10 साल की छोटी बहन दिव्यांशी और महज ढाई वर्ष का छोटा भाई सौरभ है। महीनों तक अकेले माँ की सेवा करने वाली इस मासूम ने जब हमेशा के लिए अपनी माँ को खो दिया, तो वह कैंसर अस्पताल में बिल्कुल अकेली और असहाय रह गई।
सरकारी व्यवस्थाओं के बीच सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल के आई बैंक एवं कैंसर अस्पताल के प्रभारी गोविंद पांडे, भास्कर भट्ट, अमनदीप कौर, निशा जोशी और सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल के अन्य समस्त स्टाफ ने जब इस छोटी सी बच्ची की यह विदारक स्थिति देखी, तो उनका मानवीय हृदय पसीज गया। सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल के स्टाफ ने किसी भी तरह की कागजी कार्यवाही या बाहरी मदद का इंतजार किए बिना अभूतपूर्व दरियादिली दिखाई। कैंसर अस्पताल के कर्मचारियों ने आपस में चंदा एकत्र कर एंबुलेंस के लिए लगभग 5,000 रुपये की राशि जमा की। इसके साथ ही, इस विपदा की घड़ी में अनाथ हुई बच्ची के भविष्य और तात्कालिक जरूरतों को देखते हुए, सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल के पूरे स्टाफ ने अपनी ओर से लगभग 15,000 से 20,000 रुपये की नकद सहायता राशि भी एकत्रित कर उस मासूम बच्ची को सौंपी।
आर्थिक मदद और एंबुलेंस की व्यवस्था होने के बाद, बच्ची को अकेले इतने लंबे सफर पर भेजना सुरक्षित नहीं था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल के आई बैंक प्रभारी ने क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी को तत्काल सूचना दी। पीयूष जोशी ने एक नाबालिग बच्ची की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए बिना समय गंवाए नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और पूर्व सांसद अजय टमटा से संपर्क कर उन्हें इस मार्मिक स्थिति से अवगत कराया। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी ने अत्यधिक संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत एसडीएम ए.बी. वाजपेई को मामले में हस्तक्षेप कर सुरक्षित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। एसडीएम वाजपेई ने तत्परता दिखाते हुए अपने साथ कार्यरत पीआरडी के जवान भुवन चंद्र को बच्ची की सुरक्षा के लिए एस्कॉर्ट के रूप में तैनात किया।
अंततः महीनों के संघर्ष और दुखद त्रासदी के बाद, सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल के स्टाफ की आर्थिक व भावनात्मक मदद तथा प्रशासनिक सुरक्षा के साये में वह 13 वर्षीय बच्ची एंबुलेंस के माध्यम से सुरक्षित अपने घर पिथौरागढ़ के लिए रवाना हो सकी। सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल के स्टाफ की यह निस्वार्थ आर्थिक सहायता, सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी की त्वरित प्रशासनिक सक्रियता और जिला प्रशासन का यह संवेदनशील संयुक्त समन्वय साबित करता है कि समाज में इंसानियत आज भी मजबूती से जिंदा है। पूरे क्षेत्र में सुशीला तिवारी कैंसर अस्पताल के कर्मियों, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासन के इस साझा मानवीय कदम की भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है।