प्रशांत झा अध्यक्ष, कपिल पैकरा सचिव निर्वाचित
रायपुर, । छत्तीसगढ़ किसान सभा का 6वां राज्य सम्मेलन 6-7 अक्टूबर को सूरजपुर में संपन्न हुआ। सम्मेलन में 25 सदस्यीय नई राज्य समिति का गठन किया गया। सर्वसम्मति से प्रशांत झा को अध्यक्ष, कपिल पैकरा को सचिव और वकील भारती को कोषाध्यक्ष चुना गया। नवनिर्वाचित कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष – संजय पराते, ऋषि गुप्ता, संयुक्त सचिव – रफीक कुरैशी, बलबीर नागेश, कार्यकारिणी सदस्य – दीपक साहू, दामोदर श्याम, जय कौशिक, राजकुमारी बिंझवार (कोरबा), दिलसाय नागेश, सोनू साय (सरगुजा), माधो सिंह, वेदनाथ राजवाड़े, बसंती देवी विश्वकर्मा (सूरजपुर), बिफन नागेश, किरण नागेश (बलरामपुर), देवान सिंह मार्को, जितेन साहू (मरवाही), वनमाली प्रधान (रायगढ़) शामिल हैं। समिति में युवाओं के जोश और वरिष्ठों के अनुभव का संतुलन रखा गया है।

सम्मेलन की शुरुआत पूरे जिले से आए किसानों की विशाल रैली से हुई, जिसने शहर का भ्रमण किया। रैली में फसल की लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य, महंगाई पर रोक, किसान आत्महत्याओं पर अंकुश, मतदाता सूचियों में गड़बड़ी को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, जमीन हड़पने और विस्थापन पर रोक तथा मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों पर रोक लगाने की मांग उठाई गई। वरिष्ठ किसान नेता माधो सिंह द्वारा झंडारोहण और शहीद वेदी पर पुष्पांजलि के बाद सम्मेलन प्रारंभ हुआ। अध्यक्षता संजय पराते, ऋषि गुप्ता, वनमाली प्रधान, माधो सिंह और गंगोत्री निषाद के अध्यक्ष मंडल ने की।
राज्य सचिव कपिल पैकरा ने राजनीतिक-सांगठनिक रिपोर्ट पेश की, जिसमें मोदी सरकार की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों पर हमले और सांप्रदायिक-फासीवादी मंसूबों का उल्लेख किया गया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में गहराते कृषि संकट पर चिंता जताते हुए “हर गांव में किसान सभा और किसान सभा में हर किसान” के नारे को अमल में लाने पर जोर दिया। रिपोर्ट में ग्रामीण मजदूर, विस्थापन पीड़ित, वनोपज संग्राहक, दूध-सब्जी उत्पादक और गन्ना किसानों को संगठित करने की रूपरेखा रखी गई। 184 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, 37 ने बहस में हिस्सा लिया और रिपोर्ट सर्वसम्मति से पारित हुई।

सांगठनिक सत्र को अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव अवधेश कुमार, बादल सरोज और केंद्रीय किसान कौंसिल सदस्य पुष्पेंद्र त्यागी ने संबोधित किया। वक्ताओं ने संयुक्त किसान मोर्चा में किसान सभा की भूमिका को रेखांकित करते हुए छत्तीसगढ़ में साझा मांगों पर सभी संगठनों को एकजुट कर व्यापक आंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया। सी.पी. शुक्ला की संयोजकता वाली प्रस्ताव समिति ने हसदेव जंगलों के विनाश, बस्तर में आदिवासियों पर राज्य प्रायोजित मानवाधिकार हनन, मनरेगा को पुनः लागू करने, पेसा और वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, भूमि अधिग्रहण प्रभावितों को रोजगार-पुनर्वास और मनरेगा में 200 दिन काम व 600 रुपये मजदूरी जैसे प्रस्ताव रखे, जो सर्वसम्मति से पारित हुए।
सम्मेलन ने जल, जंगल, जमीन, खनिज और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा तथा विस्थापन के खिलाफ संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया। तेलंगाना के नालगोंडा में होने वाले 36वें अखिल भारतीय सम्मेलन के लिए 10 प्रतिनिधियों – दीपक साहू, प्रशांत झा, कपिल पैकरा, संजय पराते, ऋषि गुप्ता, राजकुमारी बिंझवार, बसंती देवी विश्वकर्मा, वकील भारती, दामोदर श्याम और रफीक कुरैशी का भी चुनाव किया गया।


































