Home उत्तराखंड व्यापार मंडल में सियासी तड़का : मंच एक, राग अनेक

व्यापार मंडल में सियासी तड़का : मंच एक, राग अनेक

638

हल्द्वानी। कहावत है – एक म्यान में दो तलवारें नहीं रहतीं, लेकिन हल्द्वानी के व्यापार मंडल में तो एक ही म्यान में भाजपा, कांग्रेस, आरएसएस और न जाने कितनी तलवारें खनक रही हैं। नतीजा यह कि 9 अक्टूबर को होने वाले वार्षिक सम्मेलन से पहले ही ढोल नगाड़े बजने से पहले ही बारात बिखर गई वाली कहानी हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आने की आहट सुनते ही दूसरे खेमे के व्यापारियों ने तेवर दिखा दिए। एक तरह से उनका साफ कहना है नवीन वर्मा ही व्यापार मंडल नहीं हैं, व्यापार मंडल में हम भी हैं। यानी हम भी अगर बच्चे हैं तो कम नहीं वाला अंदाज। दरअसल जब हर कोई अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग अलापने लगे तो संगठन का सुर बिगड़ना लाजमी है। और यहां तो आलम ये है कि भाजपा और आरएसएस का ठप्पा लगा व्यापारी वर्ग ‘हां में हां’ मिला रहा है, तो दूसरा खेमा ‘ना-ना’ की रट लगाए बैठा है। रंग में भंग पड़ना ही था। प्रदेश के सबसे बड़े संगठन प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के इस सम्मेलन को लेकर पहले सोचा था कि सब एक जाजम पर बैठेंगे, लेकिन अब हालात ये हैं कि जाजम बिछने से पहले ही कंबल खिंचने लगे हैं। महानगर की पूरी निर्वाचित टीम का प्रांतीय संगठन से नाता तोड़ना, अध्यक्ष योगेश शर्मा और महामंत्री मनोज जायसवाल का वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाकर प्रेस कांफ्रेंस करना – ये सब बताता है कि अंदरखाने कुछ तो दाल में काला है नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली हो चली है।

एक तरफ कांग्रेस पृष्ठभूमि वाले योगेश शर्मा, दूसरी तरफ भाजपा सरकार में दायित्वधारी नवीन वर्मा – यानी व्यापार मंडल कम, भाजपा-कांग्रेस का अखाड़ा ज्यादा नजर आ रहा है। सीधी बात है, जब व्यापार कम और राजनीति ज्यादा होने लगे तो संगठन का भगवान ही मालिक होता है। 9 अक्टूबर का सम्मेलन अब व्यापारियों का संगम कम, शक्ति प्रदर्शन का मंच ज्यादा बन गया है। अब देखना ये है कि मुख्यमंत्री के सामने एकता का राग बजेगा या मंच पर ही भांडा फूट जाएगा। फिलहाल तो घर का भेदी लंका ढाए वाली स्थिति है, और व्यापारी खुद ही पूछ रहे हैं – व्यापार करें या राजनीति?